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Rel Ki Bat

121.00

हरिमोहन झा

जन्म : 18 सितम्बर, 1908 को और निधन 28 फरवरी, 1984 को। दर्शनशास्त्र में एम. ए.। मैथिली के मूर्द्धन्य साहित्यकार और पिता पं. जनार्दन झा की छाया में रचना-कर्म का प्रारम्भ। प्रायः मैथिली भाषा में ही लेखन, लेकिन अनेक कृतियाँ अन्य भारतीय भाषाओं में अनूदित। सन्‌ 1985 में साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत-सम्मानित।

कृतियाँ : ‘कन्यादान’, ‘दिवरागमन’, ‘खट्टर ककाक तरंग’, ‘चर्चरी’, ‘रंगशाला’, ‘प्रणम्य देवता’, ‘जीवनयात्रा’।

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Description

हरिमोहन झा

जन्म : 18 सितम्बर, 1908 को और निधन 28 फरवरी, 1984 को। दर्शनशास्त्र में एम. ए.। मैथिली के मूर्द्धन्य साहित्यकार और पिता पं. जनार्दन झा की छाया में रचना-कर्म का प्रारम्भ। प्रायः मैथिली भाषा में ही लेखन, लेकिन अनेक कृतियाँ अन्य भारतीय भाषाओं में अनूदित। सन्‌ 1985 में साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत-सम्मानित।

कृतियाँ : ‘कन्यादान’, ‘दिवरागमन’, ‘खट्टर ककाक तरंग’, ‘चर्चरी’, ‘रंगशाला’, ‘प्रणम्य देवता’, ‘जीवनयात्रा’।

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